डॉक्टरों के मुताबिक युवती के शरीर में संक्रमण बहुत ज्यादा फैल गया था, जिसके कारण तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
झोलाछाप से गर्भपात के दौरान बिगड़ी थी हालत
फाफामऊ थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती गर्भवती हो गई थी। आरोप है कि उसका प्रेमी रविराज गर्भपात कराने के लिए उसे सोरांव क्षेत्र में एक झोलाछाप डॉक्टर के पास ले गया था। होलागढ़ के बारादरी बाजार स्थित एक निजी क्लीनिक में गर्भपात की कोशिश के दौरान युवती की हालत अचानक बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होती देख प्रेमी उसे वहीं छोड़कर भाग गया।
परिजनों ने अस्पताल में कराया भर्ती
युवती की हालत बिगड़ने की सूचना मिलने पर परिजन उसे पहले सोरांव के एक अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने बताया कि उसका गर्भपात कराया गया है और हालत नाजुक है। इसके बाद उसे स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) रेफर कर दिया गया, जहां 10 फरवरी की रात उसे भर्ती किया गया और आईसीयू में इलाज शुरू हुआ।
चार माह की थी गर्भवती, बच्चेदानी निकालनी पड़ी
एसआरएन अस्पताल में जांच के दौरान पता चला कि युवती चार महीने की गर्भवती थी। असुरक्षित तरीके से गर्भपात कराने के कारण उसकी बच्चेदानी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी और आंतों का एक हिस्सा भी खराब हो गया था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसकी जान बचाने की कोशिश की और बच्चेदानी निकालनी पड़ी, लेकिन अंदरूनी संक्रमण तेजी से फैल गया।
25 दिन बाद इलाज के दौरान मौत
करीब 25 दिनों तक आईसीयू में इलाज के बाद शनिवार सुबह युवती ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के अनुसार उसके शरीर में संक्रमण बहुत ज्यादा फैल चुका था। लगातार इलाज और कई प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
दो झोलाछाप अब भी फरार
इस मामले में फाफामऊ पुलिस पहले ही युवती के प्रेमी रविराज को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। हालांकि युवती को मौत के मुंह में धकेलने वाले आरोपी झोलाछाप सत्येंद्र पटेल और उसके साथी राहुल पटेल को अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। इस मामले में एसीपी अरुण कुमार पाराशर का कहना है कि दोनों की तलाश की जा रही है। घटना के बाद से ही वह क्लीनिक बंद कर फरार हैं। उनके हरसंभावित ठिकानों पर दबिश कराई जा रही है।
क्लीनिक पर 25 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं
खास बात यह है कि इतने गंभीर मामले में भी अब तक उस क्लीनिक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जहां युवती को ले जाकर उसका एबॉर्शन कराया गया और उसे मौत के मुंह में धकेला गया।
इस मामले में सीएमओ डॉ. एके तिवारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। न ही कोई कंप्लेन मिली है। अब सवाल यह है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग को इस घटना की जानकारी कैसे नहीं हुई।
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