प्रयागराज 
माघ मेले की रौनक विदा होते ही प्रयागराज के तट से एक ऐसी #सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। जहाँ कुछ दिनों पहले तक लाखों की भीड़ और मंत्रोच्चार की गूंज थी, वहां आज सिर्फ चीखें और सिसकियां सुनाई दे रही हैं। गंगा नदी में नहाने गए दो किशोरों के लिए 'मोक्षदायिनी' की धारा 'काल' बन गई।
पीपा पुल संख्या चार के पास का वह शांत किनारा अचानक तब दहशत में बदल गया, जब नहाते समय दो किशोर—आदित्य पटेल (15 वर्ष) और कार्तिक तिवारी—अचानक गहरे पानी में समाने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो लहरों के बीच हाथ-पांव मारते उन बच्चों की आंखों में मौत का खौफ साफ दिख रहा था। जब तक लोग कुछ समझ पाते और मदद के लिए शोर मचता, गंगा की अगाध जलराशि ने दोनों को अपने आगोश में ले लिया।

इस हादसे ने एक डरावनी हकीकत को भी उजागर किया है। महाशिवरात्रि के साथ माघ मेला आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुका है, जिसके कारण सुरक्षा चक्र हट गया है जल पुलिस, पीएसी और गोताखोरों की टीमें मेला क्षेत्र से वापस लौट चुकी हैं। घाटों पर अब न तो बैरिकेडिंग का सख्त पहरा है और न ही कोई चेतावनी देने वाला। जब शोर मचा, तब पुलिस को सूचना दी गई और आनन-फानन में स्थानीय गोताखोरों को बुलाया गया, लेकिन तब तक कुदरत अपना क्रूर खेल खेल चुकी थी।

एक घर का चिराग बुझा, दूसरे की तलाश जारी
गोताखोरों की घंटों की मशक्कत के बाद आदित्य पटेल (निवासी पहाती, फूलपुर) का बेजान शरीर जब पानी से बाहर निकाला गया, तो परिजनों के करुण क्रंदन से पत्थर का दिल भी पसीज गया। 15 साल के मासूम का शव देख किनारे पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। वहीं, कार्तिक तिवारी (मूल निवासी जौनपुर) अब भी लापता है। अंधेरे और पानी की गहराई के बीच उसकी तलाश एक डरावनी अनिश्चितता की तरह जारी है।

"मेला खत्म हो सकता है, पर गंगा की गहराई का खतरा कम नहीं होता। यह हादसा एक चेतावनी है कि सुरक्षा के अभाव में की गई एक छोटी सी लापरवाही भी उम्र भर का मातम दे सकती है।"
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