सरकारी खाते पर रोक विकास कार्य ठप बैंक के चक्कर काट रहे ग्राम प्रधान सचिव जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल।

बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा तेन्दुआईकला में बैंक के कर्मचारी द्वारा मनमानी लापरवाही से KYC के नाम पर महीनों से उत्पीड़न ग्राम पंचायतों के खाते बंद होने से विकास कार्य ठप।

 मानदेय न मिलने से पंचायत सहायक और केयरटेकर भुखमरी की कगार पर।

संवाददाता पंकज कुमार आलापुर अम्बेडकर नगर 

 अम्बेडकरनगर जनपद के 
विकास खंण्ड जहाँगीरगंज क्षेत्र के अंतर्गत बैंक ऑफ बड़ौदा BoB की तेन्दुआईकला शाखा इन दिनों आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुकी है। यहाँ केवाईस के नाम पर आम उपभोक्ताओं से लेकर ग्राम जनप्रतिनिधियों तक को महीनों से दौड़ाया जा रहा है। लापरवाही का आलम यह है कि बैंक प्रबंधन, बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा तेन्दुआईकला में बैंक के सभी कर्मचारी द्वारा KYC के नाम पर महीनों से उपभोक्ताओं को परेशान कर दौड़ाया जाता है उत्पीड़न ग्राम पंचायतों के खाते बंद होने से विकास कार्य ठप।की इस मनमानी के कारण क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों के सरकारी खाते Zero Balance Accountsभी फ्रीज यानी बंद हो चुके हैं। इसके चलते पंचायतों के विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं और पंचायत सहायक व केयरटेकरों का महीनों का मानदेय फंसा हुआ है।प्रधान और सचिव परेशान अधिकारी मौन मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायतों के खातों की केवाईसी कराने के लिए संबंधित ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव महीनों से बैंक के चक्कर काट रहे हैं। हर बार कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी खाता चालू नहीं किया जा रहा है। प्रधानों का कहना है कि बैंक कर्मी आज कल का बहाना बनाकर टालमटोल करते हैं जिससे वित्तीय लेनदेन पूरी तरह बाधित हो गया है।मानदेय न मिलने से कर्मचारियों में आक्रोश खाते बंद होने का सबसे बुरा असर धरातल पर काम करने वाले पंचायत सहायकों सफाई कर्मियों और सामुदायिक शौचालयों के केयरटेकरों पर पड़ा है। पिछले कई महीनों से भुगतान न होने के कारण इन कर्मचारियों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है कर्मचारियों का कहना है कि त्योहारों के मौसम में भी बैंक की लापरवाही के कारण हमारा मानदेय नहीं मिल सका जिससे हमारे परिवारों में मायूसी है।आम जनता भी त्रस्त न केवल सरकारी खाते बल्कि क्षेत्र के हजारों गरीब ग्रामीणों वृद्धों और विधवा महिलाओं के पेंशन वाले खाते भी केवाईसी के नाम पर ब्लॉक पड़े हैं। बैंक परिसर में सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं लेकिन शाम को जनता को बैरंग ही लौटना पड़ता है। जनता का आरोप है कि बैंक में कोई सुचारू व्यवस्था नहीं है और न ही कोई सुनने वाला है।क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और पीड़ित ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि तेन्दुआईकला बैंक ऑफ बड़ौदा के इस तानाशाही सिस्टम की तत्काल जांच कराई जाए और बंद पड़े खातों को चालू कराकर व्यवस्था में सुधार किया जाए अन्यथा वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। प्रकरण में शाखा प्रबंधक का पक्ष जानना चाहा परंतु सीयूजी नंबर पर फोन रीसीव करने की जहमत नहीं उठायें शाखा प्रबंधक जिससे किसी प्रकार की कोई भी जानकारी बैंक संबंधित उपलब्ध नहीं हो सकी।
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