शाहरुख खान के साथ पहली ही फिल्म… और महिमा रातों-रात स्टार बन गईं।
उनकी मुस्कान, उनकी सादगी और स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी ने दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया। परदेस के लिए उन्हें Filmfare Best Female Debut Award भी मिला। ऐसा लग रहा था जैसे बॉलीवुड में उनका सफर अभी लंबा जाने वाला है…
लेकिन फिर साल 1999 को बेंगलुरु में ' दिल क्या करे ' की शूटिंग चल रही थी।
सुबह महिमा सेट पर जा रही थीं। तभी एक दूध का ट्रक गलत दिशा से आया और उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि कार का शीशा टूटकर उनके चेहरे में जा धंसा। हड्डियां बच गईं…लेकिन चेहरे पर कांच के टुकड़े बुरी तरह फंस चुके थे। डॉक्टरों ने सर्जरी की और उनके चेहरे से 67 कांच के टुकड़े निकाले गए।
इसके बाद चेहरा सूज चुका था... गहरे निशान थे। और कैमरे के सामने लौटना लगभग असंभव सा लग रहा था। उस दौर में मीडिया के एक हिस्से ने उन्हें ‘Scarface’ तक कह दिया। जिस अभिनेत्री को कभी पर्दे की खूबसूरती कहा जाता था, अब वही अपने चेहरे को आईने में देखने से डर रही थी।
लेकिन उस मुश्किल वक्त में दो लोग उनके साथ खड़े रहे…दिल क्या करे के निर्माता अजय देवगन और काजोल। महिमा ने बाद में बताया कि दोनों ने दोस्त और प्रोड्यूसर की तरह उनका साथ दिया। अजय उन्हें मुंबई के बेहतरीन प्लास्टिक सर्जन के पास लेकर गए। सबसे बड़ी बात... उन्होंने इस हादसे को मीडिया और इंडस्ट्री से दूर रखा, ताकि महिमा पर जल्द काम पर लौटने का दबाव न बने।
महिमा को लंबे समय तक सूरज की रोशनी से बचना पड़ा। चेहरे की त्वचा और टांकों के कारण उन्हें अंधेरे कमरे में रहना पड़ता था। और शायद सबसे मुश्किल लड़ाई थी…अपने ही चेहरे को फिर से स्वीकार करना। महिमा को खुद भी लगने लगा था कि शायद अब बॉलीवुड में उनके लिए पहले जैसी जगह नहीं बची।
कई बड़ी फिल्मों के मौके हाथ से निकल गए।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने धीरे-धीरे वापसी की। धड़कन , कुरुक्षेत्र … दीवाने… लज्जा… दिल है तुम्हारा… बागबान…हर फिल्म के साथ वह जैसे दुनिया को बता रही थीं... चेहरे पर निशान आ सकते हैं…लेकिन हौसले पर नहीं। उन्होंने छोटे रोल्स और स्पेशल अपीयरेंस से भी खुद को पर्दे से जोड़े रखा।
सलमान खान की फिल्म ' तेरे नाम ' के मशहूर गाने “ओ जाना कह रहा है दिल, ओ जाना…” में भी उनकी स्पेशल अपीयरेंस याद की जाती है। 90s की वो मासूम मुस्कान…जिसे दर्शकों ने परदेस में पहली बार देखा था, वक्त और मुश्किलों के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
महिमा चौधरी की जिंदगी में मुश्किलें सिर्फ उनके करियर तक सीमित नहीं रहीं।
19 मार्च 2006 को उन्होंने आर्किटेक्ट और बिजनेसमैन बॉबी मुखर्जी से शादी की। अगले साल, 2007 में, उनकी बेटी अरियाना का जन्म हुआ।लेकिन शादीशुदा जिंदगी ज्यादा समय तक सहज नहीं रही। रिश्ते में आई परेशानियों और मतभेदों के बाद दोनों 2013 में अलग हो गए और तलाक हो गया।
और फिर साल 2022 में उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। एक बार फिर जिंदगी ने उन्हें दर्द, डर और अनिश्चितता के सामने खड़ा कर दिया। लेकिन इस बार भी उन्होंने हार नहीं मानी। कीमोथेरेपी के दर्द और मानसिक तनाव के बीच उन्होंने हिम्मत बनाए रखी और कैंसर के इलाज से गुजरीं।
एक महिला…जिसने कभी चेहरे पर 67 कांच के टुकड़ों का दर्द सहा था, वही महिला कुछ साल बाद जिंदगी की एक और बड़ी लड़ाई लड़ रही थी। और शायद यही महिमा चौधरी की कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा है... उन्होंने जिंदगी को हमेशा उसके सबसे मुश्किल मोड़ पर जवाब दिया।
आज महिमा चौधरी का जन्मदिन है। लेकिन आज सिर्फ एक अभिनेत्री का जन्मदिन नहीं है… आज उस महिला का जन्मदिन है ... जिसने कैमरे की चमक के पीछे छिपे दर्द को सहा, अपने चेहरे के निशानों को स्वीकार किया, करियर के उतार-चढ़ाव देखे, मां की जिम्मेदारी निभाई और बीमारी के सामने भी खड़ी रही।
महिमा चौधरी… सिर्फ ‘परदेस’ की गंगा नहीं हैं। वह उस संघर्ष की कहानी हैं, जिसमें इंसान टूटकर भी दोबारा खड़ा हो सकता है।
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