प्रयागराज। जब शहर की रफ्तार थमने लगती है और अधिकांश लोग अपने घरों की ओर लौट रहे होते हैं, तब शहर की सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे भी अनेक लोग होते हैं, जिनके लिए अगला भोजन आज भी एक चुनौती बना रहता है। इन्हीं जरूरतमंद, निराश्रित और वंचित लोगों के बीच पिछले चार वर्षों से निरंतर सेवा, संवेदना और सम्मान के साथ काम कर रहा है मदद फाउंडेशन.
समाजसेवी एवं मीडिया प्रोफेशनल मंगला प्रसाद तिवारी द्वारा वर्ष 2023 में स्थापित यह संस्था अल्प समय में ही मानव सेवा के क्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने में सफल रही है। संस्था की प्रतिबद्धता का सबसे सशक्त उदाहरण उसका ‘रविवार की रसोई’ अभियान है, जो पिछले 210 सप्ताहों से लगातार प्रत्येक रविवार बिना किसी व्यवधान के संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से अब तक 30 हजार से अधिक जरूरतमंद एवं निराश्रित लोगों तक भोजन पहुंचाया जा चुका है।
भोजन से आगे जरूरतमंदों के जीवन तक पहुंचने की पहल
मदद फाउंडेशन का उद्देश्य केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है। संस्था की कार्यशैली का केंद्र समाज के उन लोगों तक सहायता पहुंचाना है, जो जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से भी वंचित हैं।
इसी व्यापक सोच के साथ संस्था समय-समय पर विभिन्न जनकल्याणकारी एवं मानवीय सहायता अभियानों का संचालन करती है। इनमें निःशुल्क भोजन वितरण, निःशुल्क पेयजल वितरण, निःशुल्क चप्पल वितरण, कंबल एवं गर्म वस्त्र वितरण, दवा एवं स्वास्थ्य सहायता, राशन सामग्री वितरण तथा आपातकालीन मानवीय सहायता प्रमुख हैं।
संस्था का प्रयास है कि सेवा किसी एक दिन, मौसम या अवसर तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरत और परिस्थिति के अनुरूप निरंतर समाज के वंचित वर्ग तक पहुंचती रहे।
‘रविवार की रसोई’ - हर रविवार सेवा का संकल्प
मदद फाउंडेशन की सेवा गतिविधियों में ‘रविवार की रसोई’ एक प्रमुख और निरंतर चलने वाली पहल बन चुकी है। प्रत्येक रविवार संस्था की टीम और स्वयंसेवक जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन तैयार करने, उसे व्यवस्थित करने और वितरण करने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।
इस अभियान की विशेषता केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक भोजन उपलब्ध कराना है। संस्था से जुड़े स्वयंसेवक जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर उन्हें भोजन प्रदान करते हैं और सेवा को मानवीय संवेदना से जोड़ने का प्रयास करते हैं।
210 सप्ताहों की निरंतर सेवा और 30 हजार से अधिक लोगों तक भोजन पहुंचाने का यह सफर संस्था की प्रतिबद्धता, टीम भावना और समाज के सहयोग का प्रमाण है।
सरकारी अनुदान के बिना, समाज के सहयोग से आगे बढ़ रही सेवा यात्रा
मदद फाउंडेशन के संस्थापक मंगला प्रसाद तिवारी के अनुसार, संस्था का प्रत्येक सेवा अभियान समाज के सहयोग से संचालित होता है। संस्था को किसी भी प्रकार का सरकारी अनुदान प्राप्त नहीं होता। इसके बावजूद जनसहयोग, क्राउड फंडिंग और समाज के संवेदनशील नागरिकों के सहयोग से सेवा की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है।
तिवारी के अनुसार, संस्था का प्रयास है कि प्रयागराज में कोई भी व्यक्ति भूखा, असहाय अथवा उपेक्षित न रहे। उनका मानना है कि सामाजिक बदलाव केवल बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच, निरंतर प्रयास और सामूहिक भागीदारी से संभव है।
मौसम बदले, सेवा का संकल्प नहीं
मदद फाउंडेशन की गतिविधियां केवल ‘रविवार की रसोई’ तक सीमित नहीं हैं। मौसम और परिस्थितियों के अनुसार संस्था अपनी सेवा गतिविधियों का विस्तार करती रहती है।
सर्दियों में कंबल एवं गर्म वस्त्र वितरण, गर्मी के मौसम में पेयजल सेवा, आवश्यकता के अनुसार स्वास्थ्य शिविर एवं दवा वितरण, तथा जरूरत के समय राशन एवं अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराने जैसे अभियान संचालित किए जाते हैं।
इन प्रयासों के पीछे संस्था की सोच स्पष्ट है - जरूरतमंदों की सहायता किसी एक अवसर की औपचारिकता नहीं, बल्कि निरंतर सामाजिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
खुशियों के अवसरों को सेवा के अवसर में बदलने की अपील
मदद फाउंडेशन समाज के नागरिकों से अपील करता है कि वे अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, पुण्यतिथि अथवा अन्य विशेष अवसरों को जरूरतमंद लोगों के साथ साझा करें।
संस्था का मानना है कि किसी विशेष अवसर की खुशी तब और सार्थक हो जाती है, जब उसका एक हिस्सा किसी जरूरतमंद के जीवन में राहत, सम्मान और मुस्कान लेकर आए।
इच्छुक व्यक्ति संस्था की सेवा गतिविधियों में अनाज, आटा, दाल, चावल, तेल, राशन सामग्री, कपड़े, कंबल, जूते-चप्पल, दवाइयां अथवा आर्थिक सहयोग के माध्यम से भागीदारी कर सकते हैं।
इस तरह समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार इस सेवा अभियान का हिस्सा बन सकता है।
एक छोटा सहयोग, किसी के लिए बड़ी मदद
मदद फाउंडेशन की पूरी सेवा यात्रा के पीछे एक सरल लेकिन प्रभावशाली विचार है - सहयोग की मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण सहयोग की भावना है।
किसी जरूरतमंद के लिए दिया गया एक भोजन, गर्मी में उपलब्ध कराया गया एक गिलास पानी, सर्दी में दिया गया एक कंबल, जरूरत के समय उपलब्ध कराई गई दवा या राशन की छोटी-सी सहायता भी उसके लिए बड़ा सहारा बन सकती है।
210 सप्ताहों की निरंतर सेवा और 30 हजार से अधिक लोगों तक भोजन पहुंचाने का सफर इस बात का प्रमाण है कि जब समाज के संवेदनशील नागरिक, स्वयंसेवक और एक समर्पित संस्था एक उद्देश्य के साथ आगे बढ़ते हैं, तो छोटी-सी पहल भी बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकती है।
प्रयागराज में मदद फाउंडेशन आज केवल एक संस्था के रूप में नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की एक जीवंत मिसाल के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
संस्था की यह यात्रा एक स्पष्ट संदेश देती है - मानवता की सेवा किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
और इसी साझा जिम्मेदारी के साथ ‘रविवार की रसोई’ से शुरू हुई यह सेवा यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है = एक भोजन, एक मदद और एक उम्मीद के साथ।
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